जिले का पहला अवसर कलेक्टर के घर पहुंचा कोरिया का भविष्य, बच्चों ने साथ बैठकर किया भोजन और साझा किए अपने सपने

जिले का पहला अवसर कलेक्टर के घर पहुंचा कोरिया का भविष्य, बच्चों ने साथ बैठकर किया भोजन और साझा किए अपने सपने ।

बैकुंठपुर। आमतौर पर कलेक्टर का कार्यालय लोगों की समस्याओं, प्रशासनिक बैठकों और सरकारी कामकाज का केंद्र होता है। लेकिन कोरिया में इस तस्वीर ने एक नया और बेहद आत्मीय रूप ले लिया। यहां जिलेभर के स्कूली बच्चे किसी सरकारी दफ्तर में नहीं, बल्कि कलेक्टर के सरकारी निवास पर पहुंचे—जहां उन्होंने कलेक्टर रोक्तिमा यादव के साथ भोजन किया, खुलकर बातचीत की और अपने सपनों को साझा किया।
झुमका जलाशय के किनारे स्थित कलेक्टर का सरकारी निवास इस खास मुलाकात का साक्षी बना। प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के बीच बच्चों के लिए आयोजित इस विशेष भोज का उद्देश्य केवल भोजन कराना नहीं था, बल्कि प्रशासन और नई पीढ़ी के बीच संवाद की दूरी कम करना था।


जब कलेक्टर के घर पहुंचे बच्चे…
कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने जिलेभर से आए स्कूली छात्र-छात्राओं को अपने निवास पर आमंत्रित किया। बच्चों के साथ बैठकर भोजन करने के बाद उन्होंने उनकी पढ़ाई, करियर, रुचियों, अनुभवों और भविष्य के सपनों के बारे में बातचीत की।
कलेक्टर से मिलने के लिए आमतौर पर बच्चों को सरकारी कार्यालय जाना पड़ता है, लेकिन इस बार कलेक्टर स्वयं बच्चों को अपने घर लेकर आईं। यही वजह रही कि बच्चों के लिए यह मुलाकात औपचारिक नहीं, बल्कि बेहद सहज और आत्मीय अनुभव बन गई।
कई बच्चों के लिए यह पहला अवसर था, जब उन्होंने जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी से इतने करीब और सहज माहौल में बातचीत की। बच्चों के चेहरे पर उत्साह था, मन में सवाल थे और कलेक्टर से सीधे संवाद करने का आत्मविश्वास भी।
पद और प्रोटोकॉल से दूर, बच्चों के बीच संवाद
इस पहल की सबसे खास बात यही रही कि यहां पद और प्रोटोकॉल से ज्यादा महत्व संवाद को दिया गया। कलेक्टर ने बच्चों के साथ बैठकर उनकी बातें सुनीं, उनके सवालों का जवाब दिया और उनके सपनों को समझने की कोशिश की।


ऐसे संवाद बच्चों के भीतर यह विश्वास पैदा करते हैं कि उनके सपने महत्वपूर्ण हैं और उन्हें पूरा करने के लिए प्रशासन भी उनके साथ खड़ा है। यह अनुभव बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें बड़े लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा भी देता है।
कोरिया जिले में यह पहला अवसर माना जा रहा है, जब स्कूली बच्चों को कलेक्टर ने अपने सरकारी निवास पर आमंत्रित कर उनके साथ भोजन और संवाद किया। यह पहल प्रशासनिक व्यवस्था को केवल कार्यालयों और फाइलों तक सीमित न रखकर समाज और खासकर बच्चों के बीच ले जाने की एक सकारात्मक कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
खूबसूरत बंगले में दिखी भविष्य की खूबसूरत तस्वीर
झुमका जलाशय के किनारे स्थित कलेक्टर का सरकारी निवास कोरिया की प्राकृतिक सुंदरता का भी एक खास हिस्सा है। झील, हरियाली और शांत वातावरण के बीच बना यह परिसर अपने आप में बेहद आकर्षक है। कोरिया के पूर्व कलेक्टर भी इस सरकारी निवास को प्रदेश के खूबसूरत सरकारी परिसरों में शामिल बता चुके हैं।
लेकिन इस परिसर की असली खूबसूरती उस समय और बढ़ गई, जब यहां जिले के भविष्य—स्कूली बच्चे—मौजूद थे।
कलेक्टर के साथ भोजन करते बच्चे, अपने सवाल पूछते बच्चे और अपने सपनों को साझा करते बच्चे… ये तस्वीरें केवल एक भोज कार्यक्रम की तस्वीरें नहीं हैं। ये उस भरोसे की तस्वीर हैं, जो प्रशासन और समाज के बीच मजबूत होना चाहिए।
क्योंकि जब प्रशासन बच्चों की समस्याएं सुनने के साथ-साथ उनके सपनों को भी सुनता है, तो संवाद की यह पहल भविष्य के आत्मविश्वास की मजबूत नींव बन जाती है।

By: Nilesh Kumar Tiwari

On: Saturday, July 25, 2026 3:57 PM

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