कलेक्टर कुणाल दुदावत सख्त, कहा— जनहित के मामलों और शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
कोरबा। जिले में प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी टी.पी. उपाध्याय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों के समयबद्ध निराकरण में लापरवाही तथा शासन की निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना की धीमी प्रगति को लेकर की गई है। कलेक्टर ने तीन दिवस के भीतर संबंधित अभिलेखों सहित स्पष्ट एवं तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि 28 जुलाई 2026 को आयोजित समय-सीमा (टीएल) बैठक में शिक्षा विभाग से जुड़े कई लंबित मामलों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान पाया गया कि जनदर्शन में प्राप्त शिकायतों का न तो समय पर निराकरण किया गया और न ही विभाग की ओर से संतोषजनक जानकारी प्रस्तुत की गई।
समीक्षा में हाईस्कूल गोपालपुर में मानदेय व्याख्याता (गणित) भर्ती में अधिक अंक प्राप्त अभ्यर्थी के चयन नहीं होने की शिकायत, सेवानिवृत्त शिक्षक को देय राशि के भुगतान में विलंब, मानदेय शिक्षक भर्ती में मेरिट के बावजूद चयन से वंचित किए जाने तथा छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत पात्र हितग्राही को सहायता राशि नहीं मिलने जैसे मामलों में गंभीर लापरवाही सामने आई।
इसके अलावा शासन की महत्वाकांक्षी निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना 2026-27 के अंतर्गत कक्षा पहली से दसवीं तक की पुस्तकों की स्कैनिंग एवं प्रगति रिपोर्ट भी संतोषजनक नहीं पाई गई। कलेक्टर ने इसे शासन की प्राथमिकता वाले कार्यों के प्रति उदासीनता माना।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने स्पष्ट किया कि जनदर्शन में आने वाले प्रत्येक आवेदन का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे आम नागरिकों की समस्याओं का संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ समाधान सुनिश्चित करें तथा शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करें।
नोटिस में जिला शिक्षा अधिकारी का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत बताते हुए तीन दिनों के भीतर संबंधित लिपिक, प्रधान पाठक अथवा प्रभारी अधिकारी के साथ आवश्यक दस्तावेजों सहित उपस्थित होकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

