तीन दशक के नक्सल खौफ के बाद मटाल की पहाड़ी पर पहली बार शान से लहराया तिरंगा

तीन दशक के नक्सल खौफ के बाद मटाल की पहाड़ी पर पहली बार शान से लहराया तिरंगा

 

गरियाबंद | स्वतंत्रता दिवस विशेष

 

मैनपुर। गरियाबंद जिले की दुर्गम पहाड़ियों में बसा मटाल गांव… एक ऐसा इलाका, जहां कभी नक्सलवाद का खौफ इस कदर था कि ग्रामीणों के लिए स्वतंत्रता दिवस मनाना और राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देना भी किसी सपने से कम नहीं था। लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई।

 

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मैनपुर थाना क्षेत्र के कुल्हाड़ीघाट के आश्रित ग्राम मटाल की पहाड़ी पर पहली बार पूरे गर्व और उत्साह के साथ तिरंगा फहराया गया। सुरक्षा बल के जवानों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर ध्वजारोहण किया। राष्ट्रगान, देशभक्ति के गीत और भारत माता के जयकारों से पूरी पहाड़ी गूंज उठी।

 

जहां कभी नक्सलियों का था खौफ, वहां अब तिरंगे की शान

 

मटाल और आसपास का इलाका करीब तीन दशक तक नक्सलवाद की चुनौती से जूझता रहा। ग्रामीणों के लिए यह क्षेत्र कभी ऐसा था, जहां नक्सलियों का प्रभाव और डर रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। लेकिन सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा व्यवस्था के बाद अब हालात बदल रहे हैं।

 

इस बदलाव की एक बड़ी तस्वीर 11 सितंबर 2025 को सामने आई थी, जब मैनपुर थाना क्षेत्र के कुल्हाड़ीघाट के आश्रित मटाल गांव की पहाड़ियों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी। पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई में एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मॉडेम बालकृष्ण समेत 10 नक्सली मारे गए थे।

 

मुठभेड़ के बाद इसी पहाड़ी पर सुरक्षा बल के जवानों ने भारत माता के जयकारे लगाए थे। उस समय यह इलाका नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता का गवाह बना था।

 

उसी पहाड़ी पर अब तिरंगे का उत्सव

 

करीब एक साल बाद उसी पहाड़ी पर तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। जहां कभी गोलियों और नक्सल खौफ की चर्चा होती थी, वहीं आज राष्ट्रगान और देशभक्ति के गीत सुनाई दिए।

 

सुरक्षा बल के जवानों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और स्वतंत्रता दिवस मनाया। ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ दिखाई दिया।

 

मटाल के ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ स्वतंत्रता दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि उस डर से आजादी का प्रतीक भी है, जिसने वर्षों तक उनकी जिंदगी को प्रभावित किया।

 

नक्सल प्रभावित इलाके में बदलाव की नई तस्वीर

 

मटाल की पहाड़ी पर फहराता तिरंगा आज सुरक्षा, विश्वास और बदलाव की कहानी कह रहा है। कभी जहां नक्सलियों का प्रभाव था, उसी जमीन पर अब ग्रामीण और जवान एक साथ खड़े होकर देश की आजादी का जश्न मना रहे हैं।

 

मटाल की पहाड़ी से उठती “भारत माता की जय” की गूंज इस बात का संदेश दे रही है कि लोकतंत्र और तिरंगे की पहुंच अब उन दुर्गम इलाकों तक भी हो रही है, जहां कभी डर का साया हुआ करता था।

 

मटाल की पहाड़ी पर लहराता तिरंगा… नक्सलवाद के खिलाफ बदलती तस्वीर और नए विश्वास की कहानी बयां कर रहा है।

By: Nilesh Kumar Tiwari

On: Saturday, August 15, 2026 9:06 PM

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