कलेक्टर निवास में सजा सपनों का आंगन, बच्चों ने बेझिझक सुनाई दिल की बात
Beyond The Classroom with the Collector ने बदला मुलाकात का अंदाज, 15 बच्चों ने कलेक्टर के साथ किया भोजन, योग और खेल के बीच साझा किए सपने
कोरिया में कलेक्टर निवास बना बच्चों के संवाद का मंच
आमतौर पर कलेक्टर से मिलने के लिए लोग सरकारी दफ्तर का रुख करते हैं। जहां फाइलें होती हैं, बैठकें होती हैं और बातचीत का एक तय दायरा होता है। लेकिन कोरिया में इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आई। कलेक्टर निवास में न कोई औपचारिक बैठक थी और न ही सरकारी कामकाज की चर्चा। यहां मौजूद थे जिले के अलग-अलग स्कूलों से चयनित 15 बच्चे और उनके बीच सहज संवाद कर रहीं थीं कलेक्टर रोक्तिमा यादव।
कलेक्टर रोक्तिमा यादव के नवाचार “Beyond The Classroom with the Collector” के तहत बच्चों को कलेक्टर निवास आमंत्रित किया गया। झुमका जलाशय के किनारे स्थित निवास में बच्चों ने कलेक्टर के साथ भोजन किया, योगाभ्यास किया, खेलों में हिस्सा लिया और अपने सपनों, रुचियों तथा भविष्य की योजनाओं को खुलकर साझा किया।
भोजन की मेज पर हुई सपनों की बात
कार्यक्रम की सबसे खास तस्वीर रही बच्चों और कलेक्टर का साथ बैठकर भोजन करना। भोजन के दौरान बच्चों से उनकी पढ़ाई, पसंदीदा विषय, रुचियों और भविष्य के लक्ष्य को लेकर बातचीत हुई।
किसी बच्चे ने अपने पसंदीदा विषय के बारे में बताया, तो किसी ने अपने मनपसंद करियर की बात साझा की। बच्चों ने सवाल भी पूछे और अपने अनुभव तथा जिज्ञासाएं भी खुलकर सामने रखीं।
कलेक्टर ने बच्चों की बातों को ध्यान से सुना और उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।
खेल और योग ने बनाया माहौल और सहज
कार्यक्रम सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रहा। बच्चों के लिए विभिन्न खेल, योगाभ्यास और मनोरंजक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इन गतिविधियों ने बच्चों को सहज होने का अवसर दिया।
कलेक्टर निवास का माहौल भी पूरी तरह अनौपचारिक नजर आया। हंसी-मजाक, खेल और बातचीत के बीच बच्चों ने बिना किसी झिझक के अपनी बात रखी।
कलेक्टर से मुलाकात का बदला अंदाज
“Beyond The Classroom with the Collector” की खासियत यही रही कि इसमें बच्चों और प्रशासन के बीच औपचारिक दूरी दिखाई नहीं दी।
न कोई आवेदन था, न कोई शिकायत और न ही मंच से भाषण। था तो सिर्फ संवाद—बच्चों की बात सुनना, उनके सवाल समझना और उनके सपनों को जानना।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों को सिर्फ कलेक्टर से मिलाना नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा, रुचि, सोच और भविष्य को लेकर उनकी आकांक्षाओं को समझना भी है।
प्रशासन और नई पीढ़ी के बीच संवाद की नई पहल
झुमका जलाशय की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच कलेक्टर निवास में बच्चों की चहल-पहल ने माहौल को अलग ही रंग दे दिया। इस पहल ने यह संदेश भी दिया कि प्रशासन केवल सरकारी योजनाओं और आदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की नई पीढ़ी को समझने और उसे प्रोत्साहित करने की भूमिका भी निभा सकता है।
बच्चों के लिए यह मुलाकात इसलिए भी खास रही, क्योंकि उन्हें एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से औपचारिक माहौल से अलग, सहज तरीके से बातचीत करने का अवसर मिला।
कलेक्टर निवास से लौटते समय बच्चों के साथ सिर्फ एक मुलाकात की याद नहीं थी, बल्कि अपने सपनों को खुलकर साझा करने का आत्मविश्वास भी था।
“Beyond The Classroom with the Collector” ने कोरिया में क्लासरूम की दीवारों से बाहर सीखने का एक ऐसा अनुभव दिया, जहां बच्चों ने सवाल किए, अपनी बातें रखीं और अपने भविष्य के सपनों को शब्द दिए।
क्योंकि बच्चों के भविष्य की नींव सिर्फ किताबों से नहीं बनती…
उसे मजबूत बनाता है संवाद, प्रोत्साहन और यह भरोसा कि उनके सपने भी मायने रखते हैं।

