कोरिया की शिक्षिका श्वेता सोनी ने गुवाहाटी में बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

कोरिया की शिक्षिका श्वेता सोनी ने गुवाहाटी में बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

सीसीआरटी की 10 दिवसीय ट्रेनिंग में पारंपरिक वेशभूषा, व्यंजन और करमा नृत्य से दिखाई जिले की सांस्कृतिक पहचान

 

कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की शिक्षिका  श्वेता सोनी ने असम के गुवाहाटी में आयोजित 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपने जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए जिले और प्रदेश का मान बढ़ाया। शासकीय प्राथमिक शाला महुआपारा, खाड़ा, विकासखंड बैकुंठपुर में पदस्थ शिक्षिका श्वेता सोनी ने 5 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2026 तक आयोजित सांस्कृतिक विविधता पर आधारित प्रशिक्षण में सहभागिता की।

सीसीआरटी (सेंटर फॉर कल्चरल रिसोर्सेज एंड ट्रेनिंग), गुवाहाटी में आयोजित इस प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों सहित दूसरे राज्यों से आए शिक्षकों ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय संस्कृति, परंपराओं और कलात्मक विरासत का प्रदर्शन किया। इस दौरान श्वेता सोनी ने कोरिया जिले की स्थानीय संस्कृति को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

उन्होंने जिले की पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, स्थानीय व्यंजनों और करमा नृत्य के माध्यम से सरगुजिहा संस्कृति की विशेषताओं को सामने रखा। साथ ही पांडो जनजाति की सांस्कृतिक पहचान और क्षेत्रीय परंपराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उनकी प्रस्तुति की अन्य राज्यों से आए शिक्षकों और प्रशिक्षण से जुड़े अधिकारियों ने सराहना की।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वल्लरी पेंटिंग, बांस की काष्ठ शिल्पकला, जूट की रस्सी से शिल्प निर्माण और कठपुतली निर्माण जैसी पारंपरिक कलाओं से परिचित कराया गया। विभिन्न राज्यों के शिक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की सांस्कृतिक विशेषताओं का प्रेजेंटेशन भी दिया। श्वेता सोनी ने अपने जिले की उपलब्धियों और सांस्कृतिक विरासत को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत कर कोरिया की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत 10 अक्टूबर 2026 को प्रतिभागियों के लिए शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन भी किया गया। सीसीआरटी गुवाहाटी में शशांक सर के मार्गदर्शन में शिक्षकों ने बॉटनिकल गार्डन, मां कामाख्या मंदिर और चिड़ियाघर का भ्रमण किया।

श्वेता सोनी ने यह सहभागिता कोरिया जिले के कलेक्टर रोक्तिमा यादव, जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता और विकासखंड शिक्षा अधिकारी देवेश जायसवाल के मार्गदर्शन में की। इस उपलब्धि के माध्यम से उन्होंने न केवल अपने जिले की सांस्कृतिक विरासत को दूसरे राज्यों के लोगों तक पहुंचाया, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं और जनजातीय संस्कृति को भी नई पहचान दिलाई।

By: Nilesh Kumar Tiwari

On: Monday, October 12, 2026 10:37 PM

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