मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतीक्षा अग्रवाल ने पौधा भेंटकर कराया आपसी सहमति से फैसला, वादी प्रतिवादी का पौधे को सुरक्षित व जीवित रखने दी जिम्मेदारी, पौधों के जीवन की तरह हरा भरा रहे रिश्ता,जिला सत्र न्यायालय बैकुंठपुर में कुल 44 पीठखंड में 20094 मामले प्रस्तावित

कोरिया में 2026 की पहली नेशनल लोक अदालत आयोजित, 44 खंडपीठों में 20 हजार से अधिक मामलों की सुनवाई


कोरिया जिले के जिला एवं सत्र न्यायालय बैकुंठपुर में शनिवार को वर्ष 2026 की पहली नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस विशेष लोक अदालत का उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों का आपसी सहमति से त्वरित और सरल समाधान करना है। अदालत परिसर में सुबह से ही वादियों और प्रतिवादियों की भीड़ देखने को मिली, जहां दोनों पक्षों को समझाइश देकर विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास किया गया।
इस लोक अदालत के लिए सिविल न्यायालय की 16 खंडपीठ और राजस्व न्यायालय की 28 खंडपीठ गठित की गई हैं। इस प्रकार कुल 44 खंडपीठों में 20,094 प्रकरणों की सुनवाई प्रस्तावित है। इन मामलों में दीवानी, राजस्व, बैंक रिकवरी, चेक बाउंस, बिजली बिल, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक विवाद सहित विभिन्न प्रकार के प्रकरण शामिल हैं। लोक अदालत के माध्यम से इन मामलों को आपसी समझौते से निपटाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम हो सके।
नेशनल लोक अदालत के दौरान एक अनूठी पहल भी देखने को मिली। जिला एवं सत्र न्यायालय की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतीक्षा अग्रवाल ने समझौता करने वाले पक्षों को पौधे भेंट कर सुलह कराई। उन्होंने वादी और प्रतिवादी दोनों को यह संदेश दिया कि जैसे पौधे की देखभाल करने से वह हरा-भरा रहता है, वैसे ही आपसी समझ और सहयोग से रिश्तों और समाज में भी सकारात्मकता बनी रहती है। साथ ही दोनों पक्षों को पौधे को सुरक्षित और जीवित रखने की जिम्मेदारी भी दी गई।
इसी क्रम में विनायक इंडस्ट्री बनाम राकेश जायसवाल के बीच चल रहे चेक बाउंस के मामले में भी आपसी सहमति से समझौता कराया गया। दोनों पक्षों ने लोक अदालत के माध्यम से विवाद को समाप्त करते हुए आपसी सहमति से समाधान स्वीकार किया।
नेशनल लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी की हार या जीत नहीं होती। दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का समाधान किया जाता है, जिससे आपसी संबंध भी बने रहते हैं और समय तथा धन की बचत भी होती है। लोक अदालत में दिया गया फैसला अंतिम माना जाता है और इसके खिलाफ किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती।
न्यायालय के अधिकारियों ने भी लोगों से अधिक से अधिक संख्या में लोक अदालत का लाभ उठाने की अपील की है, ताकि छोटे-बड़े विवादों का जल्दी और सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान हो सके।

विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव जज अमृता दिनेश मिश्रा नेशनल लोक अदालत के आयोजन में विशेष भूमिका रही

By: Nilesh Kumar Tiwari

On: Saturday, March 14, 2026 11:18 AM

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