आखिरकार जवाब दे ही दिया जर्जर पुलिया ने… बारिश में टूटा आवागमन का रास्ता, तीन गांवों के हजारों लोग प्रभावित
डेढ़ साल से पुलिया निर्माण की मांग, कलेक्टर से लेकर विधायक और प्रभारी मंत्री तक लगाई गुहार… अब बारिश में पुलिया क्षतिग्रस्त होने से आवागमन पूरी तरह बाधित
कोरिया:बरसात शुरू होते ही ग्रामीण इलाकों में सड़क और पुल-पुलियों की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायत डुमरिया से गिरजापुर पहुंच मार्ग पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित सड़क में आंजोकला नवन पानी नाला पर बनी पुलिया बारिश के चलते क्षतिग्रस्त हो गई है। पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के बाद करीब तीन गांवों के लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है।
बताया जा रहा है कि इस मार्ग से लगभग 3 हजार की आबादी का आवागमन होता है। ग्रामीणों के लिए यह रास्ता एनएच-43 और डुमरिया क्षेत्र तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग है। पुलिया क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।
डेढ़ साल से लगातार उठाई जा रही थी मांग
ग्रामीणों के अनुसार पुलिया की स्थिति लंबे समय से खराब थी। इसके निर्माण और स्थायी समाधान के लिए पिछले करीब डेढ़ साल से लगातार प्रशासन से मांग की जा रही थी। इस संबंध में कलेक्टर को कई बार लिखित आवेदन दिया गया। बताया जा रहा है कि पुलिया निर्माण से संबंधित फाइल आज भी डीएमएफ शाखा में लंबित है।
ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक से भी पुलिया निर्माण की मांग की। इसके अलावा प्रभारी मंत्री और मुख्यमंत्री को भी लिखित रूप से समस्या से अवगत कराया गया। बावजूद इसके अब तक पुलिया निर्माण या वैकल्पिक आवागमन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।
बारिश ने खोल दी व्यवस्था की पोल
अब बारिश के दौरान पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से हालात और गंभीर हो गए हैं। तीन गांवों के लोगों का आवागमन प्रभावित है। सबसे बड़ी परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। बच्चों का स्कूल आना-जाना मुश्किल हो गया है और अभिभावकों के सामने भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिया की मरम्मत या नए पुलिया निर्माण की दिशा में कार्रवाई की गई होती, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।
अब वैकल्पिक व्यवस्था की दरकार
पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वे अब मुख्य मार्ग तक कैसे पहुंचेंगे? प्रशासन के सामने तत्काल वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की चुनौती है, ताकि ग्रामीणों और स्कूली बच्चों का आवागमन बहाल हो सके।
डेढ़ साल से लगातार मांग के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ और अब बारिश में पुलिया पूरी तरह जवाब दे गई।
सवाल यह है कि आखिरकार जिम्मेदार कौन?
क्या संबंधित विभाग को पहले से पुलिया की जर्जर स्थिति की जानकारी नहीं थी?
क्या डीएमएफ शाखा में लंबित फाइल पर समय रहते निर्णय नहीं लिया जा सकता था?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा था?
अब ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल मौके का निरीक्षण कर वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करे और पुलिया निर्माण की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जाए।

